Essay Of Diwali In Hindi Language

दीपावली पर निबंध – नमस्कार दोस्तों मै हिमांशु ग्रेवाल आपका HimanshuGrewal.com पर तहे दिल से स्वागत करता हूँ|

आज मै आपके साथ हिन्दुओं का मुख्य और प्रिय त्यौहार दीपावली के बारे में कुछ खास चर्चा करने जा रहा हूँ| तो चलिए शुरू करते हैं.

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सबसे पहले जानते हैं की आपको इस लेख में क्या-क्या जानने को मिलेगा|

  1. दीपावली शब्द के 4 अलग-अलग अर्थ|
  2. महत्वपूर्ण बाते दीपावली के त्यौहार के बारे में|
  3. दीपावली कबसे, कैसे और क्यों मनाते हैं?
  4. आज के समय में दीपावली के त्यौहार को कैसे मनाया जाता है?
  5. दीपावली हिन्दुयो के लिए खास त्यौहार क्यों है?
  6. सिक्खों के लिए दीपावली खास त्यौहार क्यों है ?

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं सन्देश|

Contents

दीपावली पर निबंध – Essay on Diwali in hindi language

दीपावली और दिवाली दोनों एक ही शब्द है, आइये सबसे पहले हम इसका अर्थ जानते हैं| दिवाली शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों के मेल से बना एक शब्द है-

  • दीप का अर्थ है दिया
  • आवली का अर्थ है पंक्ति या फिर अंग्रेजी में इसे लाइन भी बोलते हैं|

यानी की हम बोल सकते हैं दीपावली का अर्थ है दिया एक पंक्ति में|

आज कल सभी विद्यालय में प्रार्थना के वक़्त इन पंक्तियों का उचारण किया जाता है-

असतो मा सदगमय ॥
तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥

इन शब्दों का अर्थ है –

  1. (हमको) असत्य से सत्य की ओर ले चलो।
  2. अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो|

दिवाली, दीपावली पर्व का महत्व

जानिये कुछ महत्वपूर्ण बाते दीपावली यानी की “रौशनी का त्यौहार दिवाली” के बारे में-

जिस तरह से ईसाई धर्म के लोगो के लिए क्रिसमस, मुस्लिम धर्म के लोगो के लिए ईद और सिख धर्म के लोगो के लिए बैसाखी बहुत मुख्य त्यौहार है ठीक उसी प्रकार हिन्दुओ के लिए दीपावली बहुत मुख्य त्यौहार है.

  1. हिंदी कैलेंडर के हिसाब से कार्तिक मास के अमावस की रात को दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है|
  2. हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है|
  3. यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है|
  4. अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से यह अक्टूबर या नवम्बर माह में मनाया जाता है|
  5. दीपावली को दीपोत्सव यानी की दीपो का उत्सव भी कहते हैं|

आइये जानते हैं भारतवर्ष में सबसे ज्यादा धूम धाम से मनाये जाने वाले त्यौहार दीपावली का महत्व

दीपावली के त्यौहार का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है| “तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो – दीपावली का त्यौहार इस वाक्य को बिलकुल सही सिद्ध करता है.

दीपावली क्यों मनाते हैं? दीपावली पर निबंध और कहानी (रामायण कथा)

महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखी रामायण में बताया गया है की – भगवन विष्णु के 10 अवतारों में से सातवे अवतार श्री राम चन्द्र जी का है|

अयोध्या के राजा श्री दशरथ प्रसाद जी के भगवान श्रीराम सबसे बड़े पुत्र थे| माता केकई के कहने पर पिता दशरथ ने अपने जान से प्यारे सुपुत्र
को 14 वर्ष के वनवास की सजा सुना दी.

पिता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवन राम वनवास के लिए चले गये अपनी पत्नी सीता मैया और अपने भाई लक्षम के साथ|

13 वर्ष 2 माह का वनवास समाप्त होने के बाद पत्नी सीता जी का रावन ने हरण कर उनको अपने देश लंका के अशोक वाटिका में पहुचा दिया|

अत्यधिक परिश्रम के बाद भगवन श्री राम और उनके भाई लक्ष्मण जी हनुमान संग बन्दर टोली की मदद से लंका पहुचे|

10 दिन के महायुद्ध के बाद भगवन श्री राम ने रावन पर विजय प्राप्त कर लिया और साथ ही उनका 14 वर्ष का वनवास की अवधि भी समाप्त हो गई.

जब भगवान श्री राम, पत्नी सीता मैया और भाई लक्ष्मण के साथ रावन से युद्ध जीत कर अपने देश अयोध्या लौटे तो उस रात अमावास की रात थी.

अयोध्या वासियों को पता था की आज उनके राजा भगवान श्री राम अपना वनवास काट कर अपने देश लौट रहे हैं|

सभी अयोध्या वासियों ने दिमाग लगाया की वो अपने राजा का स्वागत कैसे करेंगे?

तभी उन्होंने पुरे अयोध्या राज्य की साफ़ सफाई कर, घी के दिए जला कर उनका स्वागत किया| कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी.

उसी दिन से कार्तिक माह के अमावास को सभी हिन्दू अपने अपने घरो एव दुकान की साफ़ सफाई करते हैं और रात में दिया जलाते हैं, नए कपडे पेहेनते हैं, अपने दोस्तों और पड़ोसियों के साथ मिठाई बाट कर त्यौहार मनाते हैं.

भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं।

आज के समय में दीपावली के त्यौहार को कैसे मनाया जाता है?

दीपावली विशेष रूप से स्वच्छता और प्रकाश का पर्व है। आज कल तो कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं| सब अपने-अपने घरों, दुकानों आदि की साफ़ सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं.

दीपावली के उत्सव पर लोग अपने घरों की मरम्मत, सफ़ेदी आदि का कार्य करवाते हैं|

  1. आज कल दिया के साथ-साथ लोग अपने घरो और दुकानों को लडियो से दुल्हन के रूप में सजाते हैं|
  2. बच्चे पटाखे और फूलझड़ी जला कर दीपावली का त्यौहार मनाते हैं|
  3. कुछ लोग अपने घरो के बाहर रंगोली भी बनाते हैं|
  4. लोग इस दिन माता लक्ष्मी जी की विशेष पूजा करते हैं|
  5. तरह – तरह के लोग पकवान भी खाते और खिलाते हैं|
  6. दीपावली की विशेष कर हर स्कूल, कॉलेज और ऑफिस में छुट्टी दी जाती है|
  7. दिवाली पर विशेष कर अब बोनस भी मिलता है, जिससे हर इन्सान मिठाई और पटाके खरीद सके|
  8. दिवाली के उपलक्ष में काफी दुकानों पर तरह-तरह के ब्रांड पर ऑफर्स भी निकले जाते हैं|
  9. घर के दुआर पर और मंदिर के पास माता लक्ष्मी के चरण के मोहर लगाते हैं|

ये थे कुछ तरीके जिस वजह के आज कल के लोगो की दिवाली और अच्छी तरह से मनाई जाती है|

दीपावली हिन्दुयो के लिए खास त्यौहार क्यों है? – Why we celebrate Diwali Festival in hindi

  1. पहली ख़ास वजह ⇒ माना जाता है की हिंदी कैलेंडर के हिसाब से दिवाली के दिन से नया वर्ष शुरू होता है|
  2. दूसरी खास वजह ⇒ माना जाता है की इस दिन माता लक्ष्मी जी सभी कर घर एक बार ज़रूर आती है और जिनका घर उनको भाता है उस घर में धन की वर्षा होती है|

भारत में दिवाली सीजन का मतलब शोपिंग सीजन है| इन दिनों गाडियों, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स और सोने की चीजों पर विशेष छूट दी जाती है इसलिए लोग खुल कर खर्च करते हैं.

अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ उपहार का आदान प्रदान भी करते हैं|

दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिस दिन सभी लोग आपस के गिले शिकवे दूर कर के एक साथ मिल के सभी चीजों को भुला के त्यौहार का मनोरंजन उठाते हैं.

त्यौहार के बहाने की घर की लडकिया और औरतो की खूब सारी शोपिंग हो जाती हैं|

सिक्खों के लिए दीपावली खास त्यौहार क्यों है ?

सिक्खों के लिए दीवाली भी महत्त्वपूर्ण त्योहारों में से एक है क्योंकि इसी दिन ही अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था|

इसके अलावा सिक्खों के लिए दिवाली की खास वजह एक यह भी है की – 1619 में दीवाली के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को जेल से रिहा किया गया था.

दोस्तों दीपावली को विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं, कहानियों या मिथकों को चिह्नित करने के लिए हिंदू, जैन और सिखों द्वारा मनायी जाती है लेकिन वे सब:-

  • बुराई पर अच्छाई,
  • अंधकार पर प्रकाश,
  • अज्ञान पर ज्ञान और
  • निराशा पर आशा की विजय के दर्शाते हैं|

अन्य भारतीय त्यौहार⇓

आज का मेरा यह लेख यही समाप्त होता है| आशा है इस लेख में आपके सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गये होंगे| अगर आपको आपके स्कूल में गृहकार्य मिला हो जैसे की दीपावली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) तो आप इसमें से कुछ विशेष चीजों को छाट कर लिख सकते है.

यह सभी जानकारी पसंद आने पर इसको लेख को फेसबुक, ट्विटर, गूगल+ अथवा व्हाट्सएप्प पर शेयर करना ना भूले और कमेंट के माध्यम से अपने विचार हमारे साथ प्रकट जरुर करें| आप सभी को हिमांशु ग्रेवाल की ओर से दिवाली की ढेर सारी बधाई| 🙂

2018 दीवाली त्यौहार पर निबंध Essay on Diwali Festival in Hindi

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दीवाली त्यौहार पर निबंध Essay on Diwali Festival in Hindi / Essay on Deepawali Festival 2018

2018 दीवाली पर निबंध Essay on Diwali in Hindi

दिवाली / दीपवाली हिन्दुओं का एक मुख्य त्यौहार है। लगभग पुरे भारत में दीपवाली त्यौहार को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। दिवाली का शुभ उत्सव प्रतिवर्ष शरद ऋतू के मौसम में आता है यानि की अक्टूबर और नवम्बर के महीने के समय। दीपावली के त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जित की ख़ुशी में मनाया जाता है।

दिवाली पांच दिनों तक मनाया जाने वाला बहुत ही बड़ा त्यौहार है जिसे बहुत ही रसमों रिवाज़ के साथ मनाया जाता है। दिवाली के उत्सव के से पहले दिन लोग धनतेरस मनाते हैं, उसके बाद नरक चतुर्दशी दुसरे दिन, तीसरे और चौथे दिन दीपावली का पर्व और पांचवे दिन भाई दूज का त्यौहार मनाते हैं।

दिवाली उत्सव और पूजा के एक हफ्ते पहले से ही लोग अपने घरों की पुताई करवा कर अच्छे से साफ़ सफाई करते हैं। साथ ही पूजा की सामग्री जैसे दिया, मोमबत्तियां, पूजा का सामन, घर के देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तथा स्वादिष्ट मिठाईयों का प्रबंध करते हैं। दिवाली पूजा के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा ली जाती है। सभी लोग इस दिन भगवान से घर की सुख-शांति और जीवन में समृद्धि की कामना सकते हैं।

लोग अपने घरों को दीपक से सजा देते हैं। लोग अपने घरों के दरवाजों के सामने सबसे पहले दीप जलाते हैं भगवान को अपने घर में आमंत्रित करते हैं। पूजा के बाद ज्यादातर लोग पटाखे फोड़ते हैं और उसके बाद अपने पड़ोसियों, दोस्तों और रिश्तेदारों में तौफे और मिठाइयाँ बाँटते हैं। दिवाली के दिन सभी सरकार और गैर-सरकारी कार्यालय, स्कूलों में छुट्टी का दिन होता है।

दिवाली का उत्सव पटाखों के बिना मनाएं Diwali Celebration without Crackers

आप सभी तो जानते ही होंगे दिवाली में पटाखों का उपयोग पुरे भारत में जोर शोर से होता है। माना जाता है दिवाली के दिन पुरे भारत का प्रदुषण 50% बढ़ जाता है। आप सभी को में निवेदन करता हूँ की इस बार बिना पटाखों के मनाएं दिवाली। पटाखों के उपयोग से चंद भर के मज़े के लिए हम अपने पर्यावरण को कई हद तक बर्बाद कर देते हैं। आतिशबाजी हमारे शरीर और पर्यावरण दोनों के लिए बहुत ही हानिकारक हैं।

दिवाली में हम पटाखों के कारण हम भारतीय ना सिर्फ भारत का बल्कि पुरे विश्व का प्रदुषण बढ़ाते हैं। पटाखों के कारण ऐसे कई प्रकार के हादसे होते हैं जिनमे बच्चों से लेकर बड़े सभी इसका शिकार हो जाते हैं। पटाखों के धुंए के कारण अस्थमा, फूस-फूस में इन्फेक्शन और कई प्रकार के अन्य बड़ी बिमारियों होती है।

पटाखों के कारण सभी प्रकार का प्रदुषण होता है जैसे वायु प्रदुषण धुआं के कारण, दवानी प्रदुषण पटाखों के आवाज़ के कारण, जहरीले पदार्थ जमीन पर पड़ने के कारण मिटटी प्रदुषण और पटाखों का जहरीला पदार्थ पानी में मिल जाने के कारण जल प्रदुषण।

दिवाली का महत्व Significance of Diwali Festival in Hindi

दिवाली त्यौहार का अध्यात्मिक महत्व सबसे पहले यही है की इस दिन अंधकार पर प्रकश की विषय का दिन माना जाता है। इस दिन को बहुत ही सुन्दर और बड़े पारंपरिक तरीके से धन की देवी, लक्ष्मी और ज्ञान के भगवान, गणेश जी की पूजा की जाती है। हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार दिवाली का त्यौहार श्री राम भगवान, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की ख़ुशी में खासकर मनाया जाता है।

भारत के कुछ क्षेत्रों में महाकाव्य महाभारत के अनुसार दिवाली का त्यौहार पांडवों के 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष के अज्ञातवास के बाद लौटने की ख़ुशी में भी मनाया जाता है। यह भी माना जाता है कि इस दिन को देवताओं और राक्षसों द्वारा समुद्र मंथन करते समय माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था। भारत के कुछ पूर्वी और उतारी क्षेत्रों में नव हिंदी वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है।

आशा करते हैं आपकी दिवाली पर यह निबंध अच्छा लगा होगा। हम सभी को प्रतिवर्ष दिवाली का उत्सव पर्यावरण की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने, स्वछता बनाये रखने और आनंद लेने के लिए मनान चाहिए। आप सभी को दीवापली की हार्दिक शुभकामनायें!

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